चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर एक अहम स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग के अनुसार, वर्ष 2010 के बाद जारी किए गए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) प्रमाणपत्रों को इस प्रक्रिया के दौरान पहचान पत्र के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
आयोग ने बताया कि हाल के वर्षों में ओबीसी प्रमाणपत्रों को लेकर कई शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद इस विषय पर जांच और कानूनी समीक्षा की गई। इसके आधार पर यह निर्णय लिया गया है कि 2010 के बाद जारी किए गए ओबीसी प्रमाणपत्रों को मतदाता सत्यापन के लिए वैध दस्तावेज नहीं माना जाएगा।
हालांकि, चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि ओबीसी वर्ग के नागरिक मतदाता बने रहने के पात्र हैं, लेकिन पहचान और सत्यापन के लिए उन्हें अन्य स्वीकृत दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। आयोग का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है।
चुनाव आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि SIR प्रक्रिया के दौरान नियमों का सख्ती से पालन किया जाए, ताकि किसी भी योग्य मतदाता को अनावश्यक परेशानी न हो और चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे।

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