साहित्य श्रेणी के लिए पोस्ट
कुछ बच्चे उम्र से नहीं, अपने संकल्प से पहचाने जाते हैं।
उनके हाथों में खिलौनों की जगह सपने होते हैं
और आँखों में अपने देश को बेहतर बनाने की चमक।
26 दिसंबर का दिन हमें याद दिलाता है
कि बलिदान केवल इतिहास नहीं होता,
वह भविष्य की नींव भी होता है।
साहिबजादों की शहादत से जन्मी प्रेरणा
आज उन बच्चों में दिखाई देती है
जो छोटी उम्र में बड़े कार्य कर दिखाते हैं।
जब कोई बच्चा मेहनत, अनुशासन और साहस से
अपनी पहचान बनाता है,
तो वह केवल पुरस्कार नहीं पाता—
वह लाखों सपनों को दिशा देता है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार
सिर्फ एक सम्मान नहीं,
यह विश्वास है कि
भारत का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।
ज़्यादा कहानियां