🌸 साहित्य श्रेणी पोस्ट (हिंदी + संस्कृत)
कुछ बच्चे उम्र से नहीं,
अपने संकल्प और साधना से पहचाने जाते हैं।
उनके हाथों में खिलौने नहीं,
भविष्य के स्वप्न होते हैं,
और आँखों में राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की चमक।
26 दिसंबर केवल एक तिथि नहीं,
यह साहस, त्याग और संस्कार का स्मरण है।
साहिबजादों की शहादत से उपजी वह ज्योति
आज उन बाल प्रतिभाओं में दिखाई देती है
जो परिश्रम और अनुशासन से
अपनी पहचान स्वयं गढ़ते हैं।
बालाः एव राष्ट्रस्य भविष्यं भवन्ति।
प्रतिभा जब परिश्रम से जुड़ती है,
तो वह केवल सफलता नहीं पाती,
वह आने वाली पीढ़ियों को भी दिशा देती है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार
एक सम्मान भर नहीं,
यह उस विश्वास की घोषणा है
कि भारत का कल सुरक्षित हाथों में है।
प्रतिभा परिश्रमेण शोभते।
भारतस्य गौरवः बालप्रतिभासु निहितः।

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